Chemistry in Hindi

  


➜ रसायन विज्ञान,  विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत पदार्थों के गुण, संघटन, संरचना, उनके आपसी सम्बन्धो व उनमें होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है।

➜ रसायन विज्ञान अर्थात Chemistry शब्द की उत्पत्ति मिस्त्र (Egypt) के एक शब्द  कीमिया (Chemea) से हुई है जिसका शाब्दिक अर्थ है - काला रंग।

➜ लेवायसिये को आधुनिक रसायन विज्ञान का पिता कहा जाता है।

➜ प्रफुल्ल चन्द्र राय को भारत में रसायन शास्त्र के पिता कहा जाता है। 


द्रव्य : प्रत्येक ऐसी वस्तु जिसमे कुछ भर हो तथा वह स्थान घेरती हो व उसका अनुभव हम अपनी इन्द्रियों से कर सकते है , द्रव्य या पदार्थ कहलाती है। पदार्थ में भार, द्रव्यमान तथा जड़ता होती है।

द्रव्य की अवस्थाएं :

भौतिक अवस्था के आधार पर पदार्थो को 3 वर्गो में बांटा गया है। ये तीन वर्ग है - ठोस, द्रव एवं गैस। इसके अतिरिक्त एक अन्य अवस्था भी है, जिसे प्लाज्मा कहते है।

ठोस :

➜ ठोस का आकार एवं आयतन निश्चित होता है।

➜ ठोस के अणु अत्यधिक निकट होते हैं।

➜ ठोस का  घनत्व उच्च होता है 

➜ ठोस को गरम किया जाता है, तब एक विशेष तापमान पर ठोस पिघल कर द्रव में परिवर्तित हो जाता है यह विशेष तापमान उस ठोस पदार्थ का गलनांक कहलाता है।

द्रव :

➜ द्रव का आयतन निश्चित होता है किन्तु आकार निश्चित नहीं होता। इसे जिस पात्र में रखा जाता है, यह उसकी आकृति को ग्रहण कर लेता है।

➜ द्रव के आयतन पर दाब का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

➜ द्रव  का घनत्व गैस से अधिक किन्तु ठोस से कम होता है।

➜ जब किसी द्रव को एक विशेष तापमान पर गर्म किया जाए और वह गैस में परिवर्तित हो जाये तो, उस विशेष तापमान को उस द्रव का क्वथनांक कहते है।

➜ जब किसी द्रव को एक विशेष तापमान पर ठण्डा किया जाए और वह वह ठोस में परिवर्तित हो जाये तो, उस विशेष तापमान उस द्रव का हिमांक कहते है।

गैस :

➜ गैस का न तो आकार निश्चित होता है और न ही आयतन निश्चित होता है।

➜ तापमान बढाने से गैस का आयतन बढ़ जाता है।

➜ गैस में कोई पृष्ठ तल नहीं होता

➜ गैसें बहुत सपीड्य होती हैं। किन्तु गैसों का संपीड़न एक निश्चित सीमा तक ही किया जा सकता है।

प्लाज्मा :

➜ प्लाज्मा द्रव्य की वह अवस्था है, जिसमे उच्च ताप पर द्रव्य के परमाणु आयनित अवस्था में होते है।

➜ फ्लोरसेंट ट्यूब्स एवं नियॉन बल्ब में प्लाज्मा होता है। नियॉन बल्ब में नियॉन गैस तथा फ्लोरसेंट ट्यूब में हीलियम या पारे का वाष्प होता है जो विद्युत ऊर्जा प्रवाहित होने पर आयनीकृत हो जाता हैं। आयनीकृत होने पर ट्यूब या बल्ब के अन्दर चमकीला प्लाज्मा तैयार हो जाता है।

द्रव्य के प्रकार 

➜ रासायनिक संघटन के आधार पर द्रव्य को तत्व, यौगिक एवं मिश्रण इन 3 वर्गो में वर्गीकृत किया जाता है।

तत्व : वह पदार्थ है, जिसे किसी भी भौतिक या रासायनिक अभिक्रिया द्वारा अन्य सरल पदार्थो में तोड़ा नहीं जा सकता। 

➜ तत्व केवल एक ही प्रकार के परमाणुओं से बना होता है।

➜ तत्व द्रव्य की तीनो अवस्थाओ में पाए जाते है।

तत्वों का वर्गीकरण :

तत्वों को उनके गुणधर्म के आधार पर दो वर्गों में विभाजित किया जाता है।

धातु

अधातु

धातु :

➜ धातु वे तत्व कहलाते है, जो सामान्य अभिक्रिया में अपने परमाणुओं से एक या अधिक इलेक्ट्रान त्याग कर धनायन बनने की प्रवृति रखते है।

➜ धातु सामान्यतः ठोस होती हैं। (अपवाद - पारा द्रव अवस्था में हैं)

➜ धातुएं ऊष्मा एवं विद्युत् की अच्छी सुचालक होती हैं।

➜ धातुएं प्रकृति में कठोर होती हैं (अपवाद सोडियम एवं पोटेशियम)

➜ धातुएं अपारदर्शी होती हैं।

➜ धातुओं में चमक होती हैं।

➜ धातुओं में आघातवर्ध्यता और तन्यता का गुण होता है।

➜ धातुओं का घनत्व अधिक और गलनांक उच्च होता है।(अपवाद - सोडियम एवं पोटेशियम )

अधातु :

➜ अधातु वे तत्व कहलाते है, जो सामान्य अभिक्रिया में  एक या अधिक इलेक्ट्रान ग्रहण कर ऋणायन बनने की प्रवृति रखते है।

➜ अधातु प्रायः ऊष्मा एवं विद्युत् की कुचालक होती हैं (अपवाद - हीरा, ऊष्मा का सुचालक होता है एवं ग्रेफाइट, विद्युत् का सुचालक होता है)

➜ अधातुएँ सामान्यतः मुलायम होती हैं (अपवाद हीरा)

➜ अधातु ठोस, द्रव एवं गैस तीनों अवस्थाओं में होती हैं।

➜ अधातुओं में प्रायः चमक नहीं होती (अपवाद ग्रेफाइट, हीरा एवं आयोडीन)

➜ अधातुओं में तन्यता का गुण नहीं पाया जाता।

➜ अधातुओं का गलनांक एवं क्वथनांक कम होता है (अपवाद- ग्रेफाइट, का गलनांक बहुत अधिक होता है)

उपधातु : ये ऐसे तत्व होते हैं जिनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं। उपधातुओं की संख्या 7 है। उपधातुओं के उदाहरण बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si). जर्मेनियम (Ge). आर्सेनिक (As), एन्टीमनी (Sh) टेलेरियम (Te) एवं पोलोनियम (Po) |

यौगिक :

➜ यौगिक एक ऐसा पदार्थ होता है जिसके अणु भिन्न - भिन्न प्रकार के परमाणुओं के  निश्चित अनुपात में संयुक्त होने से बनते है।

➜ यौगिकों का निश्चित रासायनिक सूत्र होता है।

➜ इन्हें उचित रासायनिक विधि द्वारा पुनः तत्वों में विभाजित किया जा सकता है।

➜ यौगिकों से इनके अवयवों (तत्वों) को भौतिक विधियों द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता।

➜ यौगिकों का संघटन निश्चित होता है क्योंकि यौगिक के निर्माण में तत्वों का रासायनिक संयोग एक निश्चित अनुपात में किया जाता है।

➜ यौगिक समांग रूप में होते हैं।

➜ यौगिकों के गलनांक, क्वथनांक निश्चित होते हैं।

➜ यौगिकों का घनत्व निश्चित होता है। 

➜ यौगिकों का घनत्व उसके अवयवी पदार्थों के घनत्व से भिन्न होता है।

➜ यौगिक के निर्माण के बाद तत्व अपना व्यक्तिगत गुण खो देते हैं किन्तु यौगिक को तत्वों में तोड़ने पर पुनः अपने व्यक्तिगत गुण को प्राप्त कर लेते हैं। 

यौगिकों को दो प्रकार के होते है।  कार्बनिक यौगिक एवं अकार्बनिक यौगिक

कार्बनिक यौगिक :

➜ कार्बनिक यौगिक में कार्बन तत्व के साथ कुछ तत्व ही शामिल होते हैं जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर एवं फॉस्फोरस आदि।

➜ कार्बनिक यौगिक प्रायः जल में अघुलनशील होते हैं।

➜ कार्बनिक यौगिक प्रायः विद्युत् के कुचालक होते हैं।

अकार्बनिक यौगिक :

➜ अकार्बनिक यौगिकों में सभी तत्व शामिल होते हैं।

➜ अकार्बनिक यौगिक जल में प्रायः घुलनशील होते हैं।

➜ अकार्बनिक यौगिक प्रायः विद्युत् के सुचालक होते हैं।

मिश्रण :

➜ जब दो या अधिक शुद्ध तत्वों को बिना किसी निश्चित अनुपात मिलाया जाता है, तब  एक अशुद्ध पदार्थ का निर्माण होता है, जिसे मिश्रण कहते है।

➜ मिश्रण के अवयवी तत्वों को भौतिक या यांत्रिक विधियों (छानना वाष्पन एवं ऊर्ध्वपातन आदि) द्वारा अलग किया जा सकता है।

➜ मिश्रण में इसके अवयवी पदार्थों के सभी गुणधर्म विद्यमान रहते हैं।

➜ मिश्रण का संघटन अनिश्चित होता है।

➜ मिश्रण के गलनांक एवं क्वथनांक अनिश्चित होते हैं। 

➜ मिश्रण का कोई निश्चित रासायनिक सूत्र नहीं होता।

➜ मिश्रण का घनत्व उसके अवयवी तत्वों के घनत्वों पर निर्भर करता है।

मिश्रण दो प्रकार का होता है- समांगी मिश्रण एवं असमांगी मिश्रण

समांगी मिश्रण  : जिस मिश्रण के प्रत्येक भाग में पदार्थों का संघटन एवं गुण एक समान होते हैं, उन्हें समांगी मिश्रण कहते है।  जैसे चीनी और जल का विलयन, नमक और जल का विलयन, आयोडीन का एथिल एल्कोहल में विलयन 

असमांगी मिश्रण  : जिस मिश्रण के प्रत्येक भाग में पदार्थों का संघटन एवं गुण एक समान नही  होता  हैं, उन्हें असमांगी मिश्रण कहते है। असमांगी मिश्रण में मिश्रण के अवयवी तत्व एक दूसरे के साथ पूरी तरह मिश्रित न होकर अलग अलग रहते हैं जैसे- लोहे एवं गंधक का मिश्रण, बालू एवं नमक का मिश्रण

मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ:

वाष्पीकरण में  किसी विलयन से ठोस व द्रव को अलग करने के लिए विलयन को गर्म किया जाता है इससे द्रव, वाष्प बनकर अलग हो जाता है एवं ठोस पाउडर के रूप में प्राप्त कर लिया जाता है।

क्रिस्टलाईजेसन :  किसी विलयन को धीरे धीरे ठण्डा करके ठोस अवस्था में बदलने की प्रक्रिया को ही क्रिस्टलाईजेसन कहते हैं। इस विधि द्वारा ठोस अकार्बनिक पदार्थो के मिश्रणों के अवयवों या संघटकों का पृथक्करण किया जाता है। इसके लिए मिश्रण को उपयुक्त विलायक में घोलकर गर्म किया जाता है। इसके बाद छान लिया जाता है। अब छनित विलयन को धीरे-धीरे ठण्डा किया जाता है। ठण्डा होने पर शुद्ध पदार्थ क्रिस्टल के  रूप में जम जाता है

आसवन : किसी द्रव को वाष्पीकृत करके पुनः ठण्डा करने के प्रक्रम को आसवन (Distillation) कहते है। आसुत जल इसी प्रक्रम द्वारा तैयार किया जाता है। 

प्रभाजी आसवन :  ऐसे मिश्रण जिनके संघटकों ) के क्वथनांकों में कम से कम अन्तर होता है, का पृथक्करण करने के लिए मिश्रण का प्रभाजी आसवन करते हैं। भूगर्भ से निकाले गये पेट्रोलियम के विभिन्न संघटकों पेट्रोल, केरोसिन, डीज़ल आदि को इसी विधि से पृथक् करते हैं।

भाप आसवन : इस विधि से उन कार्बनिक पदार्थों का शुद्धीकरण किया जाता है जो कि जल  में अविलेय होते हैं परन्तु गर्म करने पर वाष्पशील होते हैं और प्रायः अपने क्वथनांक पर अपघटित हो जाते हैं। जैसे मेथिल एल्कोहल, एसिटेल्डिहाइड, एसीटोन, एथिल एल्कोहल आदि का पृथक्करण करने के लिए भाप आसवन विधि का प्रयोग किया जाता है।

ऊर्ध्वपातन : यदि किसी ठोस पदार्थ को गर्म करने पर वह बिना द्रवित हुए सीधे वाष्पीकृत हो जाता है, तो इस घटना को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। जैसे कपूर, नेफ्थलीन, ऐथ्रासीन, अमोनियम क्लोराइड, बेंजोइक अम्ल आदि को इसी विधि से पृथक करते हैं। 

निस्यन्दन : यदि किसी द्रव में कोई ठोस पदार्थ निलम्बित  है तो उसे अलग करने के लिए इस विधि का प्रयोग करते हैं। निलम्बित कणों के अनुसार अलग-अलग निस्पंदकों  का प्रयोग करते हैं। 

वर्णलेखन : इस विधि से अलग अलग अधिशोषण क्षमता वाले पदार्थो को किसी मिश्रण से पृथक किया जाता है। 

विलयन :

दो या दो से अधिक ऐसे समांगी मिश्रण को जिसका कोई निश्चित संघटन नही होता है , विलयन कहलाता है। 

विलायक तथा विलेय  : विलयन में जिस पदार्थ की मात्रा अधिक होती है, उसे विलायक तथा जिस पदार्थ की मात्रा कम होती है उसे विलेय कहते है। 

विलयन के प्रकार - संतृप्त विलयन, असंतृप्त विलयन, वास्तविक विलयन, निलम्बन, कोलाइड 

संतृप्त विलयन : वह विलयन, जिसमे विलायक(द्रव) में विलेय(ठोस) की, किसी ताप पर अधिकतम सम्भव मात्रा उपस्थित रहती है। 

असंतृप्त विलयन : वह विलयन जिसमे विलेय की मात्रा, उस ताप पर संतृप्तता की आवश्यक मात्रा से कम रहती है।  असंतृप्त विलयन में विलेय को मिलाने पर वह विलायक में तब तक घुलती रहती है जब तक विलयन संतृप्तन हो जाये।

वास्तविक विलयन : वास्तविक विलयन में विलेय के कण आणविक आकार के होते है। 

निलम्बन : निलम्बन एक एक विषमांगी मिश्रण है, इसमें ठोस के छोटे छोटे कण पूरे द्रव में बिना घुले फैले रहते है।
कोलाइड  :  कोलाइड एक  प्रकार का विषमांगी मिश्रण है, जिसमे विलेय के कणों का आकार वास्तविक विलयन से अधिक परन्तु निलम्बन से छोटा होता है।


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