Universe And Solar System in Hindi

 


 


सूक्ष्मतम अणुओं से लेकर विशाल आकाशगंगाओं तक के सम्मिलित स्वरूप को ब्रह्मांड कहा जाता है । 

➜ मिस्र-यूनानी परम्परा के खगोलशास्त्री क्लाडियस टॉलमी (140 ई.) ने सर्वप्रथम ब्रह्मांड का नियमित अध्ययन कर जियोसेन्ट्रिक (भूकेन्द्रित) अवधारणा का प्रतिपादन किया। इस अवधारणा के अनुसार पृथ्वी ब्रह्मांड के केन्द्र में है तथा सूर्य व अन्य ग्रह इसकी परिक्रमा करते हैं।

➜ 1543 ई. में पोलैंड के निकोलस कॉपरनिकस ने हेलियोसेन्ट्रिक अवधारणा (सूर्यकेन्द्रित) का प्रतिपादन किया। इस अवधारणा में कॉपरनिकस ने यह बताया कि ब्रह्मांड के केन्द्र में पृथ्वी नहीं, बल्कि सूर्य है। 

➜ 1805 ई. में ब्रिटेन के खगोलशास्त्री विलियम हरोल ने दूरबीन की सहायता से अंतरिक्ष का अध्ययन कर बताया कि सौरमंडल आकाशगंगा का एक अंश मात्र है। 

➜ अमेरिका के खगोलशास्त्री एडविन पो. हब्बल ने 1925 ई. में यह स्पष्ट किया कि दृश्यपथ में आने वाले ब्रह्मांड का व्यास 250 करोड़ प्रकाश वर्ष है तथा इसके अंदर हमारी आकाशगंगा की भाँति लाखों आकाशगंगाएँ स्थित है। 


ब्रह्मांड की उत्पत्ति से सम्बंधित सिद्धांत 

बिग बैंग सिद्धांत (Big Bang Theory): जॉर्ज लेमेंतेयर

साम्यावस्था सिद्धांत (Steady State Thoery): थॉमस गोल्ड एवं हर्मन चांडी

दोलन सिद्धांत (Pulsating Universe Theory): डॉ. एलन संडेजा


बिग बैंग सिद्धांत : 

➜ ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सम्बंध में यह सर्वाधिक मान्य सिद्धांत है। 

➜ इस सिद्धान्त का प्रतिपादन बेल्जियम के खगोलशास्त्री एवं पादरी जॉर्ज लेमेंतेयर ने किया था।

➜ बिग बैंग सिद्धांत के अनुसार आज से लगभग 13.8 अरब वर्ष पूर्व वर्तमान ब्रह्मण्ड एक अत्यधिक सघन  एवं अत्यंत उच्च तापमान वाले एकल पिण्ड (अथवा बिन्दु) के रूप में था। पिण्ड में एक महाविस्फोट (Big Bang) हुआ जिससे इसमें निहित पदार्थों का विखराव प्रारम्भ हो गया और कालांतर में इन्हीं पदार्थों के समूहन से ब्रह्मण्डीय पिण्डो एवं आकाशगंगाओं का निर्माण हुआ। इनमें पुनः विस्फोट से निकले पदार्थों के समूहन से बने असंख्य पिंड तारे कहलाए। इसी प्रक्रिया से कालान्तर में ग्रहों व उपग्रहों का भी निर्माण हुआ। इस प्रकार, बिग बैंग परिघटना से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई तथा तभी से ब्रह्मांड में निरन्तर विस्तार जारी है। इसके साक्ष्य के रूप में आकाशगंगाओं के बीच बढ़ती दूरी का संदर्भ दिया जाता है।

➜ ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए यूरोपियन सेंटर फॉर न्यूक्लियर रिसर्च सर्न (CERN) ने 30 मार्च, 2010 को जेनेवा में पृथ्वी की सतह से 100 फीट नीचे एवं 27 किमी. लंबी सुरंग में लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (LHC) नामक ऐतिहासिक महाप्रयोग सफलतापूर्वक किया। ➜ इसमें प्रोटॉन बीमों को लगभग प्रकाश को गति से टकराया गया तथा हिग्स बोसॉन कणों के निर्माण का प्रयास किया गया।इस महाप्रयोग के माध्यम से वैज्ञानिक 15 अरब वर्ष पहले हुई उस ब्रह्मांडीय परिघटना को प्रयोगशाला में दोहराना चाहते हैं, जिसे विज्ञान की दुनिया में बिग बैंग के नाम से जाना जाता है। 


आकाशगंगा :

➜ ब्रह्मांड में लगभग 100 अरब आकाशगंगाएं (Galaxy) हैं।

➜ आकाशगंगा असंख्य तारों का एक विशाल पुंज होता है, जिसमें एक केन्द्रीय बल्ज (Bulge) एवं तीन पूर्णनशील भुजाएँ होती है।

➜ प्रत्येक आकाशगंगा में लगभग 100 अरब तारे होते हैं। 

➜ एंड्रोमेडा हमारी आकाशगंगा के सबसे निकट की आकाशगंगा है, जो हमारी आकाशगंगा से 22 मिलियन प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है। 

➜ हमारी आकाशगंगा को मंदाकिनी कहा जाता है। इसकी आकृति सर्पिल (Spiral) है। 

➜ हमारी आकाशगंगा का व्यास एक लाख प्रकाश वर्ष है।

➜ मिल्की वे रात के समय दिखाई पड़ने वाले तारों का समूह है, जो हमारी आकाशगंगा का ही भाग है। 

➜ ऑरियन नेबुला हमारी आकाशगंगा के सबसे शीतल और चमकीले तारों का समूह है। 

➜ सूर्य हमारी आकाशगंगा का एक तारा है। यह आकाशगंगा की परिक्रमा 200 मिलियन (20 करोड़) वर्षों से भी अधिक समय में कर रहा है। एनेनेमस सौरमंडल बाहर बिल्कुल एक जैसे दिखने वाले जुड़वा पिड़ों का एक समूह है।

➜ प्रॉक्सिमा सेन्चुरी सूर्य का निकटतम तारा है। यह सूर्य से 43 प्रकाश वर्ष दूर है।

➜ गोल्डीलॉक क्षेत्र किसी सौरमण्डल के तारे (सूर्य) से वह निश्चित दूरी होती है, जहाँ स्थित ग्रहों का तापमान जीवन के लिए उपयुक्त होता है।

 

तारे को जीवनचक्र :

➜ तारो में नाभिकीय संलयन की प्रक्रिया होती  है, जिसमें हाइड्रोजन के अणु मिलकर होलियम के अणु बनाते है। अंततः तारो के केन्द्र का हाइड्रोजन समाप्त हो जाता है, किन्तु इसको बाह्य परत में हाइड्रोजन का होलियम में बदलना जारी रहता है। धीरे-धीरे तारा ठंडा होकर लाल रंग का दिखाई देने लगता है, जिसे रक्त दानव (Red Giants) कहा जाता है। लाल दानव चरण में पहुचने के बाद तारे का भविष्य उसके प्रारम्भिक द्रव्यमान पर निर्भर करता है।

➜ यदि तारों का द्रव्यमान 1.4 Ms (जहाँ Ms सूर्य का द्रव्यमान है)[इसे  चन्द्रशेखर सीमा भी कहा जाता है] से कम होता है तो वह तारा लाल दानव से  श्वेत वामन (White Dwarf) और अंततः काला वामन (Black Dwarf)  में परिवर्तित जाता है।

➜ तारे का द्रव्यमान सूर्य के द्रव्यमान से कई गुना अधिक होता है तो, मुक्त रूप से घूमते इलेक्ट्रॉन अत्यधिक वेग के कारण नाभिक को छोड़कर बाहर चले जाते हैं तथा न्यूट्रॉन बचे रह जाते हैं। इस अवस्था को न्यूट्रॉन तारा या पल्सर कहते हैं। न्यूट्रॉन तारा भी असीमित समय तक सिकुड़ता चला जाता है अर्थात् न्यूट्रॉन तारे में अत्यधिक परिमाण में द्रव्यमान अंततः एक ही बिन्दु पर संकेन्द्रित हो जाता है। ऐसे असीमित घनत्व के द्रव्य युक्त पिड को कृष्ण छिद या ब्लैकहोल कहते हैं। इस ब्लैकहोल से किसी भी द्रव्य, यहाँ तक कि प्रकाश का पलायन भी नहीं हो सकता। इसीलिए ब्लैकहोल को देखा नहीं जा सकता। 


सौरमंडल :

सूर्य और उसके चारो ओर भ्रमण करने वाले ग्रह एवम उनके उपग्रह तथा धूमकेतु, उल्काए , क्षुद्रग्रह को संयुक्त रूप से सौरमंडल कहा जाता है। 


सूर्य :

पृथ्वी से न्यनतम दूरी

14.70 करोंड़ किमी

पृथ्वी से अधिकतम दूरी

15.21 करोंड़ किमी

पृथ्वी से माध्य दूरी

14.98 करोंड़ किमी

सूर्य का व्यास

1392000 किमी

आयतन

पृथ्वी से 13 लाख गुना ज्यादा

द्रव्यमान

पृथ्वी से 332000 गुना ज्यादा

केन्द्रीय घनत्व

100 ग्राम प्रति घन सेमी

सतह का ताप

6000° C

केंद्र का ताप

15 मिलियन° C

सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश को पहुचने में लगा समय

मिनट 20 सेकेण्ड

➜ सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित है। यह बहुत बड़ा है एवं अत्यधिक गर्म गैसों से बना है।

➜ सूर्य के समस्त ऊर्जा का स्रोत नाभिकीय संलयन है। 

➜ सूर्य सौरमंडल के लिए प्रकाश एवं ऊष्मा का एकमात्र स्रोत है।

➜ सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है।

➜ सूर्य का वह भाग जो केवल सूर्यग्रहण के समय दिखाई देता है, उसे कोरोना कहते हैं।

➜ चन्द्रमा अथवा सूर्य के चारों ओर पक्षाभ एवं पक्षाभ स्तरी बादलों के प्रतिबिम्ब से बने श्वेत दूधिया रंग के छल्ले को प्रभामंडल कहते हैं।

➜ सूर्य के प्रकाशमंडल से सौर तूफान तीव्र गति से निकलता है जिस कारण वह सूर्य की आकर्षण शक्ति को पार कर अंतरिक्ष में चला जाता है, इसे सौर ज्वाला (Solar Flares) कहते हैं। जब यह पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करता है, तो हवा के कणों से टकराकर रंगीन ➜ प्रकाश उत्पन्न करता है। जिसे उत्तरी ध्रुव पर अरौरा बोरियालिस तथा दक्षिणी ध्रुव पर अरौरा आस्ट्रेलिस कहते हैं। सौर ज्वाला जहां से निकलती है, वहाँ काले धब्बे दिखाई पड़ते हैं। जिसे सौर कलक कहते हैं। यह सूर्य के अपेक्षाकृत ठंडे भाग होते हैं।

➜ पृथ्वी सूर्य के निकटतम दूरी पर 3 जनवरी को होती है, इस स्थिति को उपसौर कहते हैं इसके विपरीत 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर होती है इस स्थिति को अपसौर कहते हैं। 

➜ सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) की स्थिति तब होती है जब चन्द्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता है। यह स्थिति केवल अमावस्या को ही होती है।

➜ हीरक वलय (Diamond Ring) का दृश्य पूर्ण सूर्य ग्रहण के समय दिखाई देता है।किसी भी परिस्थिति में पूर्ण सूर्यग्रहण 8 मिनट से अधिक नहीं हो सकता है।


बुध :

➜ बुध सूर्य का सबसे निकटतम तथा सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है। 

➜ यह लगभग 88 दिनों में सूर्य की परिक्रमा पूर्ण कर लेता है। 

➜ सूर्य और पृथ्वी के बीच होने के कारण  बुध एवं शुक्र की आंतरिक ग्रह कहते है। 

➜ बुध (Mercury) एवं शुक्र (Venus) ग्रह के कोई उपग्रह नहीं है। 

➜ वायुमंडल के अभाव के कारण बुध पर जीवन संभव नहीं है।

➜ बुध ग्रह पर दैनिक तापांतर सबसे अधिक लगभग (560° C ) रहता है। 

➜ बुध का एक दिन पृथ्वी के 90 दिन के बराबर होता है। 

➜ परिमाण में यह पृथ्वी का 1/18वाँ भाग है।

➜ बुध के सबसे पास से गुजरने वाला कृत्रिम उपग्रह मैरिनर-10 था, जिसके द्वारा भेजे गए चित्रों से पता चलता है कि इसकी पर कई पर्वत एवं मैदान है। 


शुक्र :

➜ शुक्र सूर्य से दूसरा सबसे निकटतम ग्रह है। 

➜ शुक्र सूर्य के चारों ओर लगभग 225 दिनों में एक चक्कर लगाता है। 

➜ शुक्र ग्रहों की सामान्य दिशा के विपरीत सूर्य का पूर्व से पश्चिम दिशा में परिक्रमण करता है।

➜ शुक्र ग्रह सौरमंडल का सर्वाधिक चमकीला ग्रह है। 

➜ शुक्र ग्रह को भोर का तारा  और सायं का तारा  कहा जाता है।

➜ शुक्र  ग्रह को पृथ्वी की जुड़वा बहन  के नाम से भी जाना जाता है।

➜ बुध के समान शुक्र का भी कोई उपग्रह नहीं है। 

➜ यह सौरमंडल का सर्वाधिक गर्म ग्रह है, इसका औसत तापमान 475° C (726 K) है।

➜ शुक्र के वायुमंडल में मुख्यतः कार्बन डाइऑक्साइड का ही संकेन्द्रण है तथा तापमान 400°C से अधिक रहता है, इस कारण शुक्र पर प्रेशर कुकर की दशा उत्पन्न होती है। 


पृथ्वी :

➜ पृथ्वी सूर्य से तीसरा सबसे निकटतम ग्रह है।

➜ पृथ्वी की आकृति जियॉड है।

➜ यह ध्रुवों के पास थोड़ी चपटी है।

➜ आकार में यह पाँचवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। 

➜ पृथ्वी यह शुक्र और मंगल ग्रह के मध्य स्थित है।

➜ पृथ्वी अपने अक्ष पर  231/2° झुकी हुई है। 

➜ पृथ्वी न तो अधिक गर्म है और न ही अधिक ठंडी। यहाँ पानी एवं वायु उपस्थित है, जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है। वायु में जीवन के लिए आवश्यक गैसें, जैसे ऑक्सीजन मौजूद है। इन्हीं कारणों से, पृथ्वी सौरमंडल का सबसे अद्भुत ग्रह है।

➜ पृथ्वी ग्रह को ग्रीन प्लैनेट की संज्ञा दी गई है।

➜ अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले रंग की दिखाई पड़ती है, क्योंकि इसकी दो-तिहाई सतह पानी से ढकी हुई है। इसलिए इसे, नीला ग्रह कहा जाता है।

➜ चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है। 


मंगल :

➜ मंगल  ग्रह सूर्य से दूरी के अनुसार पृथ्वी के बाद चौथा ग्रह है। 

➜ यह सूर्य की परिक्रमा 687 दिनों में पूरी करता है। 

➜ मंगल की सतह लाल होने के कारण इसे लाल ग्रह की संज्ञा दी जाती है।

➜ मंगल ग्रह पर वायुमंडल अत्यंत विरल है। 

➜ मंगल ग्रह के वायुमंडल संघटन  में 95.3% कार्बन डाइऑक्साइड, 2.7% नाइट्रोजन, 1.6%आर्गन, 0.15% ऑक्सीजन और जल पाया जाता है। 

➜ मंगल के दो उपग्रह फोबोस  और डीमोस  हैं। डीमोस सौरमंडल का सबसे छोटा उपग्रह है।

➜ मंगल पर पाया जाने वाला पर्वत निक्स ओलंपिया  है, जो एवरेस्ट से लगभग तीन गुना बड़ा है।

➜ मंगल पर जीवन की संभावना तथा उसके वातावारण अध्ययन के लिए नासा (NASA) का क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह पर ग्रेल क्रेटर (Gale Crater) नामक स्थान पर पहुंचा।

➜ मंगल ग्रह के अन्वेषण के लिए भारत का प्रथम अभियान मार्स आर्बिटर मिशन (MOM) या मंगलयान है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो (IRSO) द्वारा मंगलयान का सफल प्रक्षेपण 5 नवंबर, 2013 को किया गया। मंगलयान उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLVC-25) के माध्यम से मंगल ग्रह की कक्षा में 24 सितंबर 2014 को पहुंचा। इस सफलता से भारत मार्शियन इलीट क्लब (अमेरिका, रूस और यूरोपीय संघ) में शामिल हो गया। 

➜ फीनिक्स मार्श लैंडर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा मंगल ग्रह के अन्वेषण हेतु 4 अगस्त, 2007 को प्रक्षेपित किया गया। 25 मई 2008 को यह मंगल ग्रह के उत्तरी ध्रुव पर उतरा। 11 नवंबर, 2008 को पृथ्वी से संपर्क टूट जाने के कारण फीनिक्स अभियान समाप्त हो गया। फीनिक्स ने ही सर्वप्रथम मंगल ग्रह पर बर्फ होने की जानकारी दी थी।


बृहस्पति :

➜ यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। 

➜ बृहस्पति को सूर्य की परिक्रमा करने में 11.9 वर्ष लगते है। 

➜ बृहस्पति अपने अक्ष पर सौरमंडल का सर्वाधिक तेज गति घूर्णन करने वाला ग्रह है।

➜ बृहस्पति के वर्तमान में 79 उपग्रहों की खोज हो चुकी है। गैनिमेड बृहस्पति के साथ ही सौरमंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है। आयो, यूरोपा, कैलिस्टो, अलमथिया इसके अन्य उपग्रह है।

➜ बृहस्पति को लघु सौर तंत्र भी कहते हैं।

➜ बृहस्पति के वायुमंडल में मुख्यतः हाइड्रोजन तथा हीलियम गैस पाई जाती है तथा अल्प मात्रा में मीथेन तथा अमोनिया का प्रमाण मिला है। बृहस्पति का वायुमंडलीय दाब पृथ्वी के वायुमंडलीय दाब की तुलना में बहुत अधिक है।

➜ बृहस्पति के पास स्वयं की रेडियो ऊर्जा  है इसलिए यह तारा एवं ग्रह दोनों के गुण को प्रदर्शित करता है।


शनि :

➜ शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है।

➜ शनि को सूर्य की परिक्रमा करने में 29.5 वर्ष लगते है। 

➜ शनि ग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसके मध्य रेखा के चारों ओर पूर्ण विकसित वलयों का होना है, जिनकी संख्या 7 है।

➜ शनि को गैसे का गोला तथा गैलेक्सी समान ग्रह भी कहा जाता है।

➜ आकाश में यह पीले रंग में दिखाई देता है।

➜ अब तक इसके 82 उपग्रहों का पता चल चूका है।

➜ टाइटन (Titan) शनि का सबसे बड़ा उपग्रह है। 

➜ शनि ग्रह का फोबे नामक उपग्रह शनि की कक्षा में घूमने के विपरीत दिशा में परिक्रमा करता है।

➜ शनि अंतिम ग्रह है , जिस जिसे आँखों इ देखा जा सकता है।


अरुण :

➜ अरुण  सूर्य से दूरी के अनुसार, सातवां तथा ग्रहों के आकार की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है। 

➜ अरुण ग्रह की खोज 1781 को विलियम हरशेल द्वारा की गई थी।

➜ अरुण ग्रह का अक्षीय झुकाव 97 अंश, 7 मिनट है। अधिक अक्षीय झुकाव के कारण इसे लेटा हुआ ग्रह भी कहते हैं।

➜ अरुण ग्रह सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा करने में 84.07 वर्षों का समय लेता है। 

➜ अरुण ग्रह, ग्रहों के सामान्य दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम दिशा में सूर्य के चारों ओर परिभ्रमण करता है। 

➜ अरुण ग्रह पर सूर्योदय पश्चिम दिशा में एवं सूर्यास्त पूरब की दिशा में होता है। 

➜ इस ग्रह पर वायुमंडल काफी सघन है, जिसमें हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन तथा अमोनिया है। 

➜ सूर्य से दूर होने के कारण यह काफी ठंडा तथा दूरदर्शी से देखने पर यह नीला हरा दिखाई देता है।

➜ अरुण ग्रह के उपग्रहों की संख्या 27 है। 

➜ शनि ग्रह की भांति अरुण ग्रह के भी चारो ओर वलय पाए जाते हैं।


वरुण :

➜ वरुण  ग्रह की खोज जर्मन खगोल शास्त्री जोहॉन गाले ने 1846 में की थी।

➜ वरुण ग्रह सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने 164.81 वर्ष लगाता है।

➜ वरुण ग्रह के दिन की अवधि 16 घंटे तथा इसका अक्षीय झुकाव 28 अंश, 48 मिनट है इसका औसत तापमान 48K (-228° C) है।

➜ वरुण ग्रह के वायुमंडल में हाइड्रोजन, हीलियम, मीथेन और अमोनिया विद्यमान है।

➜ वरुण ग्रह के 14 उपग्रह है। इनमें ट्रिटोन एवं मेरीड प्रमुख हैं। 


प्लूटो :

➜ प्लूटो  सभी सौरमंडलीय पिंडो में सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर है। 

➜ प्लूटों को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में 247.7 वर्ष का समय लगता है।

➜ प्लूटों की खोज वर्ष 1930 में क्लाइड टाम्बेग ने की थी। 

➜ इसे सौरमंडल का नौवां एवं सब से छोटा ग्रह माना गया था, परंतु 14-25 अगस्त, 2006 मध्य प्राग (चेक गणराज्य) मे संपन्न अंतरराष्ट्रीय खगोलीय संघ (JAU) की 26वीं महासभा की बैठक में प्लूटो को ग्रह की श्रेणी से हटाकर बौना ग्रह (Dwari) की श्रेणी में डाल दिया गया क्योंकि प्लूटों की कक्षा वरुण कक्षा से ओवरलैप करती है। 

➜ प्लूटों के 5 उपग्रह है। 


उपग्रह :

➜ वे आकाशीय पिंड जो अपने ग्रह की परिक्रमा के साथ ही सूर्य की भी परिक्रमा करते है , उपग्रह कहलाते है। 

➜ बुध और शुक्र ग्रह के कोई भी उपग्रह नही है। 

➜ बृहस्पति के पास सबसे अधिक उपग्रह है। 

➜ चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह है। 


सुपर मून : सुपर मून वह स्थिति है, जिसमे चन्द्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। इसमें चंद्रमा 14% ज्यादा बड़ा और 30% चमकीला दिखाई देता है।

ब्लू मून : जब एक कैलेंडर माह में 2 पूर्णिमा होती है, तो दूसरी पूर्णिमा का चाँद ब्लू मून कहलाता है।

ब्लड मून : लगातार चार पूर्ण चन्द्र ग्रहण को ब्लड मून कहा जाता है।

उल्का पिंड : उल्का अंतरिक्ष में तीव्र गति से घूमते हुए अत्यंत सूक्ष्म ब्रह्मांडीय कण हैं। जब ये पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते है, तो घर्षण से जलने के कारण ये चमकने लगते हैं, जिन्हें टूटने वाला तारा भी कहा जाता है।

धूमकेतु  या पुच्छल तारे : आकाशीय धूल, बर्फ और हिमानी गैसों के पिंड है, जो सूर्य से दूर ठंडे व अंधेरे क्षेत्र में रहते हैं। सूर्य के चारों ओर ये लंबी किंतु अनियमित या असमकेन्द्रित  कक्षा में घूमते हैं। धूमकेतु अपनी कक्षा में घूमते हुए कई वर्षों के पश्चात जब ये सूर्य के समीप से गुजरते हैं तो गर्म होकर इनमें गैसों की फुहारे निकलती हैं, जो एक लंबी चमकीली पूंछ के समान प्रतीत होती है। कभी-कभी ये पूछ लाखों किमी. लंबी होती हैं।

क्षुद्रग्रह : मंगल और बृहस्पति के मध्य क्षेत्र में सूर्य की परिक्रमा करने वाले हजारो पिंड है , इन्हें ही क्षुद्रग्रह या अवान्तर ग्रह कहा जाता है।

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